US President Joe Biden । intelligence agencies । find out the origins of the deadly COVID-19 pandemic । cross the globe । 90 days । Chinese Virus |

 

  • US President Joe Biden । Intelligence Agencies । Find Out The Origins Of The Deadly COVID 19 Pandemic । Cross The Globe । 90 Days । Chinese Virus

 

वॉशिंगटन5 दिन पहले

कोरोनावायरस की उत्पत्ति के बारे में जानने के लिए अमेरिका ने कोशिशें तेज कर दी हैं। US प्रेसिडेंट जो बाइडेन ने अमेरिकी जांच एजेंसी को इसकी बारीकी से जांच करने के लिए कहा है। उन्होंने इस जांच की रिपोर्ट 90 दिनों के अंदर मांगी है।

बाइडेन ने जांच एजेंसियों को चीन की वुहान लैब से वायरस निकलने की आशंका को लेकर भी जांच करने को कहा है। उन्होंने जांच एजेंसियों से कहा है कि ये वायरस जानवर से फैला या किसी प्रयोगशाला से, इस बारे में स्पष्ट जांच की जाए।

इंटरनेशनल कम्युनिटी से सहयोग की अपील
बाइडेन ने जांच में अंतर्राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं को मदद करने के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने इंटरनेशनल कम्युनिटी से जांच में सहयोग करने की अपील की है। बाइडेन ने कहा, ‘अमेरिका दुनियाभर में उन देशों के साथ सहयोग जारी रखेगा, जो वायरस की जांच सही ढंग से कराना चाहते हैं। इससे चीन पर पारदर्शी और अंतर्राष्ट्रीय जांच में भाग लेने का दबाव डालने में आसानी होगी।

बाइडेन का बयान उस वक्त सामने आया है, जब अमेरिका के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. एंथनी फॉसी ने वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) से कोरोना की उत्पत्ति को लेकर जांच आगे बढ़ाने की मांग की है।

 

चीन पर दबाव बढ़ेगा
अमेरिका कोरोनावायरस की जांच के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कोरोनावायरस टास्क फोर्स के चीफ डॉक्टर एंथनी फौसी ने कुछ दिनों पहले इशारों में कहा था कि कोरोनावायरस की शुरुआत की जांच की जानी चाहिए और इस मामले में किसी थ्योरी को खारिज नहीं किया जा सकता। इसके पहले ऑस्ट्रेलियाई सरकार के एक मंत्री ने भी इसी तरह का बयान दिया था।

कुछ दिन पहले ‘वीकेंड ऑस्ट्रेलिया’ ने भी एक एक्सपर्ट के हवाले से कहा था कि चीन 2015 से जैविक हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है और उसकी मिलिट्री भी इसमें शामिल है। इस एक्सपर्ट ने शक जताया था कि लैब में रिसर्च के दौरान गलती से यह वायरस लीक हुआ। इसके बाद अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने सोमवार को एक रिपोर्ट में कहा- चीन वायरस की जो थ्योरी बताता है, उस पर शक होता है, क्योंकि नवंबर 2019 में ही वहां वुहान लैब के तीन वैज्ञानिकों में इसके लक्षण पाए गए थे और उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था।

WHO की मुश्किलें फिर बढ़ेंगी
डोनाल्ड ट्रम्प जब राष्ट्रपति थे, तब उन्होंने कई बार सार्वजनिक तौर पर कहा था कि कोरोनावायरस को चीनी वायरस कहा जाना चाहिए, क्योंकि यह चीन से निकला और चीन ने ही इसे फैलाया। ट्रम्प ने तो यहां तक दावा किया था कि अमेरिकी जांच एजेंसियों के पास इसके सबूत हैं और वक्त आने पर इन्हें दुनिया के सामने रखा जाएगा। हालांकि, ट्रम्प चुनाव हार गए और मामला ठंडा पड़ गया। अब बाइडेन के सख्त रुख ने चीन और WHO की मुश्किलें फिर बढ़ा दी हैं।

WHO को ट्रम्प चीन की कठपुतली कहते रहे। उन्होंने इस संगठन की फंडिंग रोक दी थी। बाइडेन ने इसे फिर शुरू कर दिया है। लेकिन, WHO पर आरोप लग रहे हैं कि उसने पूरी जांच किए बगैर ही चीन को क्लीन चिट दे दी और कहा कि वायरस लैब से लीक नहीं हुआ। अब अमेरिका के सख्त रुख के बाद WHO पर दबाव बढ़ेगा, क्योंकि दूसरे देश भी उससे जवाब मांगेंगे।

 

चीन के वुहान लैब के बाहर मौजूद सुरक्षाकर्मी। शक है कि इसी लैब से कोरोनावायरस लीक हुआ। (फाइल फोटो)

चीन का दखल नहीं होना चाहिए
‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के मुताबिक, व्हाइट हाउस के अफसरों ने इस हफ्ते की शुरुआत में ही साफ कर दिया था कि WHO को नए सिरे से और साफ सुथरी जांच करनी होगी। व्हाइट हाउस ने यह भी कहा था कि इस जांच से चीन को दूर रखा जाए। अब अगर WHO ऐसा नहीं करता है तो अमेरिका उसके लिए परेशानी का सबब बन सकता है। अमेरिकी हेल्थ सेक्रेटरी जेवियर बेरेका और उनकी टीम को शक है कि कोरोनावायरस लैब एक्सीडेंट की वजह से लीक हुआ। इस मामले में कुछ सबूत भी उनके पास बताए जाते हैं। बेरेका ने तो यहां तक कहा था कि चीन के कट्टर दुश्मन ताइवान को इस जांच का ऑब्जर्वर बनाया जाना चाहिए, जबकि वो WHO का मेंबर नहीं है।

पेरिस ग्रुप नामक एक ग्रुप ऑफ रिसर्चर्स ने भी पिछले दिनों साफ तौर पर कहा था कि कोरोनावायरस लैब एक्सीडेंट या फिर जानबूझकर फैलाया गया।